1039.
डरता सांस ही को आवै नी
इतना डरता है कि सांस तक नहीं आता।
जब कोई अधिक भयभीत होता है तब कहा जाता है।
1040.
डरतो डूम करै सुभराग
डरता हुआ डोम शुभराग करता है।
भय से काम करनेपर
1041.
डांग भागी बो ही डोबरां जोगी परी है।
1042.
डाकण केरी मासी
डाकिन किसकी मौसी
वह मौसी का सम्बन्ध नहीं देखती सबको हानि करती है।
1043.
डाकण ही, फेर जरख चढ़गी
डाकन तो थी फिर जरख पर चढ़ गई।
स्वभाव से दुष्ट व्यक्ति को अनुकूळ साधन प्राप्त होने पर ऐसा कहा
जाता है।
1044.
डाकण ने मासी कह’र बतलाबणो
डायिन को मौसी कहकर पुकारना।
दुष्ट को सम्मान अथवा प्रेम व्यवहार से प्रस रखना चाहिये।
अत्याचारी या दुष्ट।
1045.
डाकण बेटो दे क ले
डायिन बेटा दे या ले।
डायिन बेटा देती नहीं, जो होता है उसे भी ले लेती है।
अत्याचारी या दुष्ट से लाभ की आशा नहीं करनी चाहिए।
1046.
डाण्यां रे ब्यांव में नोंतियार भेज्यो है
1047.
डाकण्यां रे व्यांव में नोतियार रो गटको
डायिनों के विवाह में आमन्त्रित लोगों का गटका 1ध्4भोजन1ध्2 होता है।
दुष्टों का संसर्ग तो निय ही कष्टदायक होता है।
किसी दुष्ट के यहां से लौटते समय यह प्रश्न किये जाने पर कि क्या
तुम्हें कुछ लाभ हुआ ऐसा कहा जाता है।
1048.
डूंगर दूर सूं ही सुवावणा लागै
पहाड़ दूर से ही सुहावने लगते हैं।
बहुत–सी बातें दूरसे ही भली जान पड़ती हैं।
1049.
डूंगर बलती दीख ज्याय घर बलती को दीसैनी
पहाड़ पर जलती आग दीख जाती है घर जलता नहीं दीखता।
हम दूसरों की बुराई देख लेते हैं पर अपनी बुराई नहीं देखते।
मि.–औरों की बुरी बात तो भाती नहीं हमको।
पर अपनी बुराई नजर आती नहीं हमको।।
1050.
डूंगरा ने किसी छियां हुवै
पहाड़ो के कौन–सी छाया होती हैं।
समर्थ पुरुषों की तुच्छ व्यक्ति सहायता नहीं कर सकता।
1051.
डूंगरिया रलियावणा आघा ईसरदास
ईसरदास कहता है कि पहाड़ दूर होने पर ही सुहावने होते हैं।
देखो ऊपर कहावत नं. 1047.
1052.
डूबते ने तिणकले रो ही स्हारो
डूबते को तिनके का ही सहारा होता है।
विपद्ग्रस्त को थोड़ा सहारा ही बहुत होता है।
1053.
डूबी पर तीन बांस
डूबी हुई पर और तीन बांस गहरा जल।
पूरी तरह से गड़बड़ गुटाला । सब चौपट।
1054.
डूम कुण जाणै कठे जांवतो दियाली करसी
डोम कौन जाने कहां जाकर दिवाली मनावेगा।
जब कोई बात निश्चित न हो।
1055.
डूमणी रे रोवण में ही राग
डोमनी के रोने मे ही राग
जब कोई बात निश्चित न हो।
किसी बात को स्वाभाविक ढंग पर कहते हुए भी उसमें किसी विशेष
बात की ओर संकेत कर देने पर।
1056.
डूमां आडी डोकरी गायां आडी भैंस
1057.
डेडरे ने जुकाम हुयो
मेंढ़क को जुकाम हुआ।
अपनी हैसियत से ऊपर काम करने वाले के प्रति व्यंग।
1058.
डोकरी मसाण केरा? आया गयांरा
हे बुढि़या श्मशान किनके? आते–जातों के।
गांठ का कुछ खर्च न करके हमेशा पराये धन या साधनों से लाभ
उठाने पर।
1059.
डोकरी रे कयां खीर कुण रांधै?
बुढि़या के कहे खीर कोन रांधै?
जब कोई किसी का कहना न माने तब।
1060.
डाढ चावळ री खीचड़ी न्यारी ही पकावै
डेढ चावल की खिचड़ी अलग ही पकाता है।
सबसे निराला रहता है या निराली बातें करता है।
1061.
डोढ घोड़ो डीडवाणे पायगा
डेढ़ घोड़ा डीडवाणें में पायगाह।
1062.
डोरी सूं पत्थर कटीजैं
डोरी से पत्थर कट जाता है।
निर्बल भी धीरे–धीरे बलवान् को नाश कर देता है।