ध
1234.
धड़ दोय मन एक
परस्पर अत्यन्त प्रेम रखने वाले व्यक्ति।
1235.
धणीयाणी राजी तो क्या करेगा काजी
मि.–मियां बीबी राजी तो क्या करेगा काजी।
1236.
धन कने धन आवै
धन के पास धन आता है।
1237.
धन केरे साथे चालै है?
धन किसके साथ चलता है?
अत: उसका सदुपयोग करना चाहिए।
मि.– सब ठाठ पड़ा रह जायगा जब लाद चलेगा बनजारा।
1238.
धन जाय जिणरो ईमान जाय
धन जाता है उसका ईमान चला जाता है।
धन बिना जब पेट नहीं भरता तो मनुष्य बेईमानी करके पेट भरता है।
1239.
धन धण्यां रो ग्वाळ रे हाथ में तो गेडियो है
धन 1ध्4गाय बैल1ध्2 अपने मालिकों का हैं, ग्वाल 1ध्4चराने वाले1ध्2 के पास
अपना तो एक डंडा है।
1240.
धन रा पनरह मकर रा पचीस, अै सरदीरा दिन चाळीस
धनराशि के पद्रह और कमर राशि के पचीस – यही चालिस दिन जाड़े
के हैं इन्हीं चालीस दिनों में जाड़ा खूब पड़ता है।
1241.
धनवाळ रै सै नेड़ा
धनवाले के सब निकट–संबंधी बन जाते है।
धन की महिमा
म्अमतलवदम पे ापद जव जीम तपबी उंदण्
1242.
धरम धण्यांरो
धर्म मालिकों का
1243.
धरम री गायरा दांत डाढ़ कांई देखणा
धर्म की दी हुई गाय के दांत डाढ़ क्या देखना।
मुत में मिली हुई वस्तु की अच्छाई बुराई नहीं देखना चाहिए
1244.
धरम री गायरा दांत देखणा कन डाढ़
धर्म की दी हुई गायके दांत देखना या डाढ़ें।
स्ववा दवज ं रपजि ीवतेम पद जीम उवनजीण्
1245.
धरम री जड़ पताळ में
धर्म की जड़ पाताल में होती है।
धर्म 1ध्4परोपकार1ध्2 से परमात्मा प्रस होता है।
1246.
धरम री जड़ सदा हरी
धर्म की जड़ सदा हरी रहती है।
1ध्4धर्म1ध्2 परोपकार करने वाले का सदा भला होता है।
1247.
धांसी, काळ री मासी
खांसी काल की मौसी है।
। कतल बवनही पे जीम जतनउचमजजमत वि क्मंजीए
1248.
धाई थारी छाछ सूं कुत्तों से छोडाव
तोबा तेरी छाछ से, कुत्तों से छुड़ा।
जब कोई दूसरे के यहां अपना काम निकालने जाय और वहां उलटी
आफत गले में पड़े तब कही जाती है।
1249.
धान खारो लागै है कांई?
धान खारा लगता है क्यां?
जब कोई आदमी कहा काम नहीं करता तो कही जाती है कि भूखों
मरना हो तो यह काम मत कर, सजा मिलेगी मार खाओगे।
1250.
धान खावां हां धूड़ को खांवानी
धान खाते हैं धूल नहीं खाते हैं।
आदमी हैं और सब समते हैं।
1251.
धान खावै है क केरिया
धान खाता है या करील के फल।
1252.
धान पार को पण पेट तो पार को कोनी
धान पराया है 1ध्4जो खाता जाता है1ध्2 पर पेट तो पराया नहीं।
अधिक खाने वाले के लिए।
1253.
धायो जाट गाडी रो व़ाद काठै
पेट भरा हुआ 1ध्4धनवान्1ध्2 जाट गाड़ी का....
1254.
धीणो भैंस रो हुव़ो भलां ही सेर ही
दूध भैंस का, हो चाहे सेर ही।
1255.
धीगांणे धरम को हुवै नी
जबर्दस्ती धर्म नहीं होता।
1256.
धीगांणे रो धरम है
जबर्दस्ती का – मुत का–धर्म है।
1257.
धरीज रा फळ मीठा
धीरज के फल मीठे होते हैं।
धीरज से लाभ होता है।
1258.
धीरां रा गांव बसै उपंवळा री देवळयां हुवै
शीघ्रता से युद्ध में उतरने वाले के केवल स्मारक ही रहते हैं और धैय्र्य
और युद्ध चातुय्र्य वाले पुरुष गांव बसा सकते है।
1259.
धूड़ खायां किसो काळ नीसरै
धल खाने से कौन–से अकाल के दिन निकलते हैं।
1260.
धूड़ खावणी जद ओछ क्यूं रळावणी
धूल खाना तब कमी क्यों करना 1ध्4खूब अच्छी तरह खाना1ध्2
बुरा काम करना तो फिर पूरा करना–उसका पूरा आनन्द उठाना।
1261.
धूड़रा दो दाणा ही कोनी
धूल के दो दाने भी नहीं।
कुछ भी बुद्धि या सामथ्र्य नहीं, पूर्ण अयोग्य।
1262.
धूल धाणी राख छाणी
व्यर्थ काम।
1263.
धूण पूणी रो सीर है
पूर्वजन्म का लेनदान है
गहरा संबंध है।
1264.
धोती आकाश सूकै
धोती आकाश में सूखती है।
अति पवित्रता रखने वाले पर व्यंग।
1265.
धोती रे मांय सै नागा
धोतीके भीतर सब नंगे।
कौन बुरा नहीं है। अपनी बुराई मनुष्य अच्छी तरह जानता है भले ही
वह प्रकाश में न आवे।
1266.
धोबी को कुत्तो घर को न घाट को
धोबी का कुत्ता घर का न घाट का।
न इधर का रहना न उधर का
1267.
धोरां री धूड़ उडै
टीबों की धूल उड़ती है।
देने को कुछ नहीं है।
1268.
धोळा तो धरम रा है
सफेद तो धर्म के हैं।
सफेद बालों के लिए 1ध्4हंसी में1ध्2
1269.
धोेळो धोळो सो दूध है
सफेद सफेद सब दूध है।
सब एक–सा है, सबको भला मानना।
1270.
धोळो धोळो सो दूध को हुवै नी
सफेद सफेद सब दूध नहीं होता
।सस पे दवज हवसक जींज हसपजजमते
ज्ीमल ंतम दवज ंसस ेंपदजे जींज नेम ीवसल ूंजमतण्