715. हमूमतरो डोको डांग फाड़ै

हुकूमत की सींक लाठीको फाड़ डालती है

हुकूमत या अधिकार पास होनेसे निर्बल भी बलवान हो जाता है।



716. हम पिया, हमारा बैल पिया, अब कूवा दुड़ पड़ो

हमने पी लिया, हमारे बैलने पी लिया, अब कुँआ गिर पड़े

स्वार्थी व्यक्ति के लिअे।



717. हम चवड़े, गळी सांकड़ी

हम चौड़े, गली तंग

अभिमानी या गर्विष्ठ के लिअे।



718. हम वडा गळी सांकड़ी बाजारका रास्ता किधर?

हम बड़े, गली तंग, बाजारका रास्ता किधर?

(ऊपरवाली कहावत देखो)



719. हर विना ही गांव़तरो?

बिना आशा के क्यों गामान्तर जाना



1049. हरी करी सो खरी

हरिने की सो खरी है

भगवान का किया होता है। भगवान की की हुई को कोई नहीं टाल सकता।



1050. हळदीरो गांठियो ले’र पंसारी वण्यो है

हल्दीका टुकड़ा लेकर पंसारी बना है



1051. हव़ेली हुवै जठै तारतखानो ही हुव़ै

महल होता है वहां पाखाना भी होता है।

बड़ेके साथ छोटा–भलेके साथ बुरा भी होता है।

मि–गांव हुवै अकुरड़ी ई हुवै।

2. दव हंतकमद ूपजीवनज पजे ूममके



1052. हांडी जिसा ठीकरा, मा जिसा डीकरा

जैसी हांडी वैसे उसके ठीकरे, जैसी मां वैसी उसकी संतान

संतानमें माता के गुण आते हैं।



1053. हांडी मं ढकणी खाव़ै

थोड़ी वस्तु में से भी अधिकांश उड़ा लेना



1054. हांती थोड़ी, हलहल घणी

हांती थोड़ी, हलचल बहुत

थोड़ी बात पर बहुत हो–हल्ला करना



1055. हाडरो बांई लाड?

हाड़का क्यां लाड़?

कहानी –एक बूढे मियां सादी करके बीबी लाये। मियां के दांत एक था।

उसने कहा–मर्द तो इकदंता भला तो बीबी ने कहा–हड्ड क्या लड्ढ मुख सफसंफा ही भला। तब मियां ने समझा कि बीबी तो मेरे से भी बूढी है।



1056. हाडो तीरसूं डरै ज्यूं डरै

कौवा तीरसे डरता है वैसे डरता है

बहुत डरता है



1057. हाडो ले डूब्यो गणगोर

हाडा (राजपूत) ले डूबा गनगौर



1058. हाथ कमाया कामणा किणने दीजै दोस?

हाथ से कमाये काम हैं, किसको दोष दिया जाय?

अपने ही किये कामोंका फल भोग रहे हैं।



1059. हाथ पोलो, जगत गोलो

हाथ पोला (ढीला) हो तो संसार भर गोला (दास) हो जाता है।

रुपया देने से सब वश में हो जाते हैं।



1060. हाथमें माला, पेट कुदाला

हाथ में माला और पेट में कुदाली

ऊपरसे धर्मात्मा बनना और पेटमें कपट रखकर हानि पहुंचाना

धोखेबाजके लिअे।



1061. हाथ में लिया कांसा, मांगण का क सांसा?

जब हाथमें भिक्षापात्र ले लिया तो मांगनेका क्या डर?

निर्लज्जता धारण कर ली फिर लज्जा कैसी? निर्लज्जके लिअे।



1062. हाथरै आळस मूँछ मूँढै में आव़ै

हाथके (जरासे) आलस्यके कारण मांछ मुंहमें आती है।

जरा–से आलस्यके कारण अधिक हानि होना।



1063. हाथरो दियो आडो आव़ै

हाथका दिया हुआ काम आता है।

दानकी महिमा।



1064. हाथ सुमरनी, पेट कतरणी

हाथमें माला और पेटमें कतरनी

कपटीके लिअे।

देखो ऊपर–हाथ में माल़ा पेट कुदाला



1065. हाथसूँ दियो दूध बराबर

हाथसे दिया दूध के समान है

स्वेच्छा से दी हुई वस्तु निर्दोष है।

मि–आप मिलै सो दूध बराबर, मांग मिलै सो पाणी।

कहै कबीर, सो रकत बराबर ज्योंमें खचाताणी।



1066. हाथ सूको, टाबर भूखो

हाथके सूखते ही बच्चा (फिर) भूखा हो जात है

बच्चों को दिनभर भूख लगती है–वे दिन भर खाते हैं।



1067. हाथसूँ हाथ और पग सूँ पग नेड़ो

हाथ से हाथ और पैर से पैर निकट



1068. हाथ ही वळ्या, होळा ही हाथ को आया नी

हाथ भी जले और होले (आगेमें भुने गीले चने) भी हाथ नहीं आये।

हानि भी उठाई, या कष्ट भी सहा, और काम भी न बना।



1069. हाथांरै किसी मँहदी लाग्योड़ी है?

हाथोंके कौन–सी मंहदी लगी हुई है।

हाथोंके गीली महँदी लगी रहती है तो उसके उतरने के भयसे काई काम नहीं करते। जब कोई व्यक्ति काम नहीं करता तब यह कहावत कही जाती है।



1070. हाथी आगै पूळो

हाथी के आगे पूला

हाथोंको अेक घास के पूले से क्या हो, क्योंकि वह बहुत थोड़ा होता है



1071. हाथी उडै जठे पूण्यांरा लेखा हुव़ै?

जहां हाथी उड़े वहां ऊनकी पूनियोंके हिसाब होते है?

मि–भींटोरा उडै जठै पायांरा लेखा हुव़?



1072. हाथी तोलीजै जठै गधा पासंग में जाय

जहां हाथी तुलते हैं वहां गधे पासंगमें जाते हैं



1073. हाथीरा दांत, कुत्तैरी पूँछ, मुमाणसरी जीभ, सदा आंटी रैव़ै

हाथीके दांत, कुत्तेकी पूँछ और कुपुरुषकी जीभ सदा टेढ़ी रहती है

कु–पुरुष सीधा नहीं बोलता।



1074. हाथीरा दांत देखाव़णरा और, खाव़णरा और

हाथीके दांत दिखलानेके दूसरे और खाने के दूसरे

अैसे आदमी के लिअे जो कहता कुछ है और करता कुछ है।



1075. हाथीरै पगमें सगळांरो पग

हाथीके पैरमें सबका पैर

अेक बड़े आदमी से अनेक छोटों का निर्वाह होता है

अेक बड़े पदार्थ में अनेक छोटे पदार्थ आ जाते हैं।



1076. हाथीरै पग में सै आयग्या

हाथीके पैरमें सब आ गये

अेक बड़े आदमी के आने से सभी आगये।

मिलाओ–सवें पदा हस्ति–पदे प्रविष्टा:।



1077. हाथीरो जोर हाथीनै को दीसैनी

हाथीका बल हाथी को नहीं दिखाई देता

अपनी शक्ति अपनेको नहीं जान पड़ती।



1078. हाथी लारै कुत्ता मोकळा भुसै

हाथीके पीछे कुत्त्े बहुत–से भोंकते हैं

मिलाओ–ज्ीम उववद कवमे दवज ीमत जीम इंतापदह व​ि कवहेण्



1079. हाथी नै हल जोतिया

हाथी को हल चलाने में लगा दिया

बड़े आदमी से सामान्य काम कराने पर।



1080. हाथी–हाथी लड़ै, बीचमें झाड़रो खो

हाथी–हाथी आपसमें लड़ते हैं, बीचमें झाड़का नाश होता है

दो सबल विरोधियों की लड़ाई में बीचमें निर्बल हानि उठाते हैं।



1081. हाथी हींडत देख कूकर लव़–लव़ कर मरै

हाथी झूमते हुअे देखकर कुत्ते भोंक–भोंक कर मरते हैं



1082. हाथे–पगै दिया जगै

हाथों–पैरों में दिये वलते हैं।

चंचल व्यक्ति के लिअे।



1083. हाथे लगाव़ै, पगे बुझावै

हाथ से आग लगाता है, पैर से बुझाता है

चुगलखोर के लिअे।



1084. हाय बिना दाय कैंनै?

हाय बिना दया किसे? जिसके चोट लगती है वही दया करता है।

जो अपना होता है उसी को दया आती है।



1085. हारिये ना हिम्मत बिसारिये ना राम नाम

जाही विध राखै राम ताहि विध रहियै।

हिम्मत नहीं हारना चाहिअे।



1086. हाल तो पन्नो पनरह बार परणीजसी

अभी तो पन्ना पन्द्रह बार विवाहा जायगा



1087. हाल तो हळदी हाटां में ही ज बोलै है

अभी तो हलदी हाट में ही बोलती है

1. अभी कार्य आरम्भ नहीं हुआ है

2. अभी कार्य रोका जा सकता है।



1088. हाल तो पायली में पाव ही को पीसीज्यो नी

अभी तो पायली में पाव भी नहीं पिसा

अभी तो बहुत बाकी है।



1089. हाल तो सेर में पूण ही को कतीज्योनी

अभी तो सेर ऊन में पौनी भी नहीं कती

ऊपरवाली कहावत देखिये



1090. हाल रात आडी है

अभी तो रात वीच में है।

अभी सफलता मिली नहीं है, न जाने क्या विघ्न आ पड़े

मिलाओ–कवीर पगड़ा दूरि है जिनके बिच है रात

का जाणै का होयसी ऊगंते परभात



1091. हिंगतै बोर खायो

हंगते हुअे बेर खाया

कहानी–एक आदमी ने शौच जाते बेर खाया जिसे दूसरे व्यक्ति ने देख लिया। वह उसे सबके सामने प्रकट करने की धमकी दिखाता और कहता–कह दूं ैया? तो एक दिन उसने चिढकर स्वयं स्वीकार कर लिया जिससे हमेशा की झंझट मिटी।



1092. हिंगतांरै बीचमें मूंढो देव़ै है

हंगते हुए बीच में मुंह देता है



1093. हिंग, रे छोरा! पेट फाड़ूँ

अरे छोरे! हंग, नहीं तो तेरा पेट फाड़ता हूं।



1094. हिंदव़ाणै में तुरकाणी कर दी

हिन्दुआने में तुर्कानी रीति कर दी

1. धर्म के विरुद्ध काम करना

2. किसी काम में विपरीत काम कर डालना



1095. हिंदू कैव़तो सरमाव़ै, लड़तो को सरमाव़ै नी

हिन्दू कहते हुए शरमाता है, लड़ता हुआ नहीं शरमाता

हिन्दू पहले कहता हुआ शरमाता है पर पीछे लड़ता हुआ भी नहीं शरमाता।

व्यावहार के आरम्भ में शर्मा शर्मी के कारण नहीं बोलता पर पीछे लड़ता है।



1096. हिचकी खांसी उबासी, तीनू काळरी मासी

हिचकी, खांसी और जंभाई–तीनों काल की मौसी हैं

तीनों मृत्यु की ओर ले जानेवाली हैं।



1097. हिमायतरी गधी हाथीरै लात मारै

हिमायत की गधी हाथी के लात मारती है

हिमायत से निर्बल भी सबल बन जाता है।



1098. हिम्मत किम्मत होय

हिम्मतकी कीमत होती है

हिम्मत बड़ी चीज है उसीसे आदर मिलता है। पूरा दोहा इस प्रकार है–

हिम्मत किम्मत होय हिम्मत बिना किम्मत नहीं

करै न आदर कोय रद कागद ज्यूं, राजिया!



1099. हिम्मते मरदां मददे खुदां

हिम्मते मरदां मददे खुदां बादशाह की लड़की से फकीर का निकाह



1100. हियैरी बात होठां आयां सरै

हृदय की बात होठों पर आ ही जाती है

हृदय का कपट कभी नहीं छिपता

मिलाओ–कोठैरी बात होठे आयां सरै।



1101. हिलायांसूं दाळ जाय, लडायांसूं पूत जाय

हिलाने से दाल बिगड़ती है, लाड़ करने से पुत्र बिगड़ता है

दाल पकाते समय दाल को बराबर कलछी से चलाना नहीं चाहिअे।

इसी प्रकार संतान का अनुचित लाड़–प्यार नहीं करना चाहिअे।



1102. हिली–हिली लूंकड़ी अड़कमतीरा खाय

लोभ लागो वाणियो, चाटे लागी गाय।

लोभ में पड़कर सर्वदा अनुचित कार्य करने वाला नुकसान उठाता है



1103. हिल्योड़ो चोर गुलगुला खाय



1104. हींग जाव़ै पण बास को जाव़ैनी

हींग चली जाती है पर उसकी गंध नहीं जाती

मनुष्य मर जाता है पर उसके गुण याद रहते हैं।



1105. हींग लगैना फिटकड़ी, रंग चोखो ही आव़ै

हींग लगे न फिटकरी पर रंग चोखा आवे

बिना खर्च काम हो जाय।



1106. हींजड़ैरी कमाई मूंछ–मुड़ाई मैं जाव़ै

हिंजड़े की कमाई मांछ मुड़वाने में जाती है



1107. हीरा पथरांसूं फोड़ननै थोड़ा ही हुव़ै

हीरे पत्थरों से फोड़ने के लिअे थोड़े ही होते हैं

बुद्धिमान मूर्खों से थोड़े ही झगड़ते हैं या माथाकूटी करते हैं



1108. हीरेसूं हीरो बींधीजै

हीरे से हीरा बिंधता है

(नीचेवाली कहावत देखो)



1109. हीरो हीरैसूं कटै

हीरा हीरे से कटता है

मिलाओ–क्पंउवदके बनज कपंउवदकेण्



1110. हुआ सौ, भागा भौ

हुया हजार, फिरो बजार

सौ रुपये हो गये तो भ्य भाग गया, हजार हो गये तो खूब बाजार में फिरो।

धन की महिमा।



1111. हुव़ जणां ईद, नहीं तो रोजा

पास हो तो ईद, नहीं तो रोजे

मिल जाय तो मौज करते हैं, नहीं मिलता है तो फाका



1112. हूं आयो, तू चाल

मैं आया, तू चल



1113. हूं गाऊँ दियालीरा, तूं गाव़ै होळीरा

मैं गाता हूं दिवाली के (गीत), तू गाता है होली के

बिना आश्य समझे बीच में बेमतलबकी बात करने पर।



1114. हूंता बहन, अणहूंतां भाई, मगरां पूठै नार पराई



1115. हूं नहीं हुती तो कैनै परणीजता? कै–थारी मांनै

मैं नीह ंहोती तो किससे विवाह करते? कि तेरी मां से



1116. हूं बड़ो, सेरी सांकड़ी

मैं बड़ा, गली तंग



1117. हूं मरूं पण तनै रांड कैव़ा’र छोडूं

मैं मरूं पर तुझे रांड़ कहला कर छोडूं



1118. हूं रहूं कोलायत, तूं रहै विलायत

मैं रहता हूं कोलयत, तू रहता है विलायत

मेरा–तेरा क्या साथ!



1119. हूं लायो मांग तांग, तूं लै गधैरी टांग

मैं तो मांग–तांग कर लाया हूं, तू गधे की टांग ले

मांगी हुई चीज में कोई हिस्सा बंटाना चाहता है तब कही जाती है।



1120. हूं ही राणी, तू ही राणी, कुण घालै चूल्हे में छाणी?

मैं भी रानी, तु भी रानी, चूल्हे में कंडा कौन डाले?

जब कोई काम न करना चाहे।



1121. है कहतां भैं आव़ै

‘है’ कहते मुंह से ‘मैं’ निकलती है



1122. है जितोई खेरीरो टुकड़ो है

जितना है उतना ही खेरीका टुकड़ा है



1123. होड कराँ लोड फूटै

होड़ करने से माथा फूटता है

होड़ करने की निंदा। जब कोई होड़ नहीं करना चाहता तब कहता है।



1124. होडाहोड क्यूं गोडा फोडै

होड़ाहोड़ी क्यों गोड़ा फोड़ता है?

दूसरे की देखादेखी या दूसरे से होड़ कर लगाकर, कोई व्यक्ति हानि उठाता है तब कही जाती है।



1125. होणहारनै नमस्कार!

होनहार को नमस्कार है

होनहार बड़ी है, उससे वश नहीं चलता।