1271 नई काया नई माया
नये सिरे से कोई काम आरम्भ करना।

1272 नकटा थारे नाक किता? निाणवे
ए नकटे, तेरे नाक कितने, तो उत्तर देता है कि–निानवे।
निर्लज्ज व्यक्ति के अशोभनीय कर्म पर व्यंग।

1273 नकटा देव सुरड़ा पुजारी
नकटे देवता परम नकटा पुजारी
जैसे को तैसा
मि.–1 जैसे मनवा आत हैं वैसे उनके मीत
2 यादृशी शीतलादेवी तादृशो खर वाहन:

1274 नकटा नाक कटी? कै सवा गज वधी
ए नकटे तेरी नाक कट गई क्या? तो कहता है कि सवा गज बढ़गई।

1275 नकारे आळो नेम पाळीवाळो पेम
‘नकार’ वाला नियम, पाली वाला प्रेम।

1276 नगद नाणो बींद परणीजै काणो
नकद पैसा हो तो काने दूल्हे का भी विवाह हो जाता है।
पैसे से सब कुछ हो सकता है।

1277 नगारों में तूती री आवाज कुण सुणै
नारों की आवाज में तूती की आवाज कौन सुने?
बहुसंख्या के समर्थन करने और एक दो के विरोध करने पर।

1278 नट बुध आवै जाट बुध नावै

1279 नटियो मूंतो नैणसी तांबो देण तलाक
मेहता नैणसी ने जहां एक बार मुंहसे ‘ना’ कह दिया तो अब वह ताम्बे
के एक पैसा भी नहीं देगा।
दृढ़ निश्चय वाले के लिये
पूरा दोहा इस प्रकार है:–
लाख लाखरां नीपजे, वड़ पीपल री साख
नटियो मुंहती नैणसी, तांबो दैन तिलाक

1280 नदिया नाव संजोग
नदी में संयोगवश कई नाव आते हैं।
संयोग से ही दो आदमियों के साथ रहना बनता है इसलिए प्रेम और भ्रातृभाव से रहना चाहिए। क्योंकि न जाने फिर जीवन में साथ रहनाबनेगा या नहीं।

1281 नदी किनारे रूंखड़ो जद–कद होय विनास
नदी के किनारे का पेड़ कभी–न–कभी नाश हो ही जाता है।

1282 नमाज छुड़ाण ने गया तो रोजा गळे पडा
नमाज छुड़ाने गये तो रोजे गले पड़े
मामूली आफत से छुटकारा पाने की चेष्टा करने पर किसी विशेषआफत में फंस जाने पर।

1283 नर जाणै दिन जात है दिन जाणै नर जाय
आदमी समता है दिन जात हैं दिन समता है आदमी जाता है।
समय के साथ सृष्टि बदलती है। दुनिया परिवर्तनशील है।

1284 नरां नाहरां डिगम रां पाकां ही रस होय
नर, नाहर और दिगंबर पकने पर–बड़ी उम्र होने पर ही रसीले होते हैं।

1285 नव नगद ना तेरह उधार
नौ नकद अच्छे तेरह उधार के अच्छे नहीं
उधार से नकद सौदा अच्छा।

1286 नव पैठार तेरह लगवाळ गधी लेग्यो कोटवाळ

1287 नव लीजै न तेरह दीज
न नौ लेना न तेरह देना।

1288 नव सौ ऊँदरा मार’र केदार रो कांकण पहर्यो है
नौ सो चूहे मारकर बिल्ली ने केदारनाथ का कंकन पहना है।
मि.– नौ सो चूहे मार बिल्ली हजको चली।

1289 नवो रे मोडो के लखी रे रांड
मोडा साधू नया बना हुआ दिखता है? ी के ऐसा कहने पर साधू
ने मन–ही–मन कहा मालूम होता है रंडी भेद ताड़ गई है।
जब कोई षड्यंत्र किसी पर प्रगट हो जाय तब।

1290 नष्ट देव री भ्रष्ट पूजा
खराब देवता की खराब पूजा।
नीच के साथ नीचतापूर्ण व्यवहार ही करना चाहिये।
मि.–शठं शाठं समाचरेत्

1291 नसीब दो पग आगे–रो–आगे
नसीब दो पैर आगे–का–आगे चलता है
नसीब कहीं जाने पर भी पीछा नहीं छोड़ता।
मि.–जो जाऊँ गुजरात, करम छावणी साथ री साथ

1292 नहिं बेली रो राम बेली
जिसका कोई सहायक नहीं उसका परमात्मा सहायक है।
मि.–निर्बल के बल राम

1293 नहिं बोल्ये में नव गुण
नहीं बोलने में नौ गुण
चुप रहना अच्छा।

1294 नहीं मामे सूं काणों मामो चोखो
मामा न हो इससे काना मामा ही अच्छा
नहीं से कुछ अच्छा
मि.– ैवउमजीपदह पे इमजजमत जींद दवजीपदह
ठमजजमत ींस​ि ं सवं​ि जींद दव इतमंक
इमजजमत ं इंतमविवज जींद दव विवज ंज ंसस
ठमजजमत ं इंक मगबनेम जींद दवदम ंज ंससण्

1295 नहीं रूंख जठे एरंडियो रूंख
जहां कोई पेड़ नहीं वहां एरंड भी पेड़ गिना जाता है
जहां अधिक गुणवान या विद्वान नहीं होता वहां थोड़े गुणवान् या विद्वानकी कदर होती है।

1296 नाई–नाई केस किता? क जजमान आगे आव है
नाई से पूछता है कि नाई नाई, मेरे सिर में बाल कितने। नाई कहता हैकि जजमान, अभी आप के आगे आ जाते हैं। अभी भेद खुल जायगा
उतावला न बन कर थोड़ी प्रतीक्षा करनी चाहिए तब तक भेद आप हीप्रगट हो जाता है।

1297 नाई री जान में सै ठाकर
नाई की जान में सै ठाकर
नाई की बरात में सब ठाकुर
जब सब सजे सजाये खड़े रहें और काम कोई न करे तब।

1298 नागाई रो लाल तुर्रो
निडर तथा लड़ने की क्षमता रखनेवाले का पलड़ा सदा भारी रहता है।

1299 नागी कांई धोवै कांई निचोवै
नंगी क्या धोवे और क्या निचाड़ै
बिना साधन के कोई कुछ नहीं कर सकता है जब पासमें कुछ भी नहो तब।

1300 नागी देख’र मन चाल
नंगी देखकर मन चलता है
किसी वस्तु को मैदान में पड़ी देखकर उसको लेने के लिये मनललचाना।

1301 नागे रो लाय में कांई बळै
आग लगे तो नंगे का क्या जले।
ठमहहमते बंद दमअमत इम ं इंदातनचजे

1302 नागो कह मैं सूं डरियो सरमां मरतां घर में बडि़यो
बदमाश कहता है कि मुसे डरा किन्तु सज्जन का शर्म मरते घर मेंचले जाना।
सरमां – लाज

1303 नाचूं कियां आंगणो टेढ़ो
नाचूं कैसे आंगन टेढ़ा
मि.– नाचन जाने आंगन टेढ़ा
। इंक ूवता उंद ंसूंले ुनंततंसे ूपजी ीपे जववेस

1304 नाचै कूदै तोड़ै तान ज्यां रो दुनिया राखै मान
दुनिया कर्मशील व्यक्ति का मान करती है।

1305 ना चैत चढै ना वैसाख ऊबरै
न चैत में चढ़ता है न वैशाख में उतरता है।

1306 नाडा टांकण बळद बिकावण, मत बाज्ये तूं आधे सावण
नाड़ों को रेत से भरने तथा बलधको बिकाने के लिए ऐ हवा! तूं आधेसावन मत चलना।
आधे सावन में तेज हवा चलने से दुष्काल पड़ता है फलत: किसान कोबैल तक बेचने पड़े हैं और नाडे छोटे–छोटे जलाशय रेत से भर जातेहै।

1307 नाजर जी बेल बधज्यो कै म्हां ताणी ही है
नाजर जी आप फलो–फूलो। नाजरजी ने उत्तर दिया फलना–फूलना केवल मेरे ही तक है।
नाजर नपुंसक के संतति नहीं होती इसी से आशीर्वाद के उत्तर मेंउन्होंने कहा बेल मेरे ही तक बढ़ेगी आगे नहीं अर्थात् मेरे बाद वंशसमाप्त हो जायगा।

1308 नाथ बिनारो बळद
जिनके संतति न हो उनका निराशाजनक कथन
नाथ – डोरी

1309 बिना नाथ डोरे का बैल
उछ्रंखल व्यक्ति के प्रति

1310 नाथी बेटा जाया

1311 नादान रो दोस्ती जीव ने जोखम
नादान की दोस्ती जीव का जोखिम
मूर्ख से दोस्ती नहीं करना चाहिये क्योंकि इससे जीवन खतरे में पड़जाता है।

1312 नानाणे ब्यांव मां पुरसारी, जीमो बेटा रात अधारी
ननिहाल में विवाह और मां परोसने वाली
सब प्रकार से साधन मिलने पर।

1313 नानी खसम करै दोही तो डंड भरै
नानी खसम करती है और नाती दंड भरता है।
अपराध कोई करे दंड किसी और को मिले।

1314 नानीबाई रे मायेरे री ठाकुरजी ने लाज
नान्हीबाई के माहेरे की ठाकुरजी को लाज है
कार्य के पूरा करने में भगवान ही लाज रखेंगे।

1315 नाने बवे घणों खावणो
छोटे कौर से अधिक खाना
थोड़ा–थोड़ा लाभ करके अधिक कमाना चाहिए।

1316 नामर्द तो खुदाने बणाया मार–मार तो कर
नामर्द तो ख्ुादा ने बना ही दिया पर कम–से–कम मारो मारो तो करे
बुजदिलों पर व्यंग। हिम्मत हारने पर उत्साह दिलाने के लिअे

1317 नामूंद बाण्यो कमा खाय, नामंूद चोर मारा जाय
नामवर बनिया कमा खाता है नामवर चोर मारा जाता है।
नामूंद – नामी

1318 नारायण एकरा इक्कीस करै
भगवान् एक के इक्कीस करे।
भगवान् वंश वृद्धि करे।

1319 नाळेर नहीं चाख्यां जकांरे काचरा ही मीठा
जिन्होंने नारियल नहीं चखा उनके लिये काचर ही मीठे।

1320 ना सावण सुरंगो ना भदवो हरो
न सावन सुरंगा न भादों हरा।

1321 ना सावण सूको ना भादवो हरो
न सावन सूखा न भादो हरा
अपरिवर्तनशील स्थिति।

1322 निकमें सूं बेगार भली
निकम्मे से बेगार अच्छी
नहीं से कुछ करना अच्छा

1323 निकमों नाई पाटला पाडा मंडै
बेकार बैठा हुआ नाई पाड़ों को मूंडता है।

1324 निखटू आवै लड़तो कमाऊ आवै डरतो
निखू पुत्र लड़ता हुआ घरमें आता है और कमाऊ पुत्र डरता हुआआता है।
दे.–कमाऊ

1325 निजर चूकी’र माल चेतन
नजर चूकी कि माल गायब

1326 निद्रा सो निवार सार, आदर सार वैरियां
निद्रा को निवारण करना सार है और वैरियों को आदर करना सार है।

1327 निध जनम्या है
निध जन मे हैं
कुपूत के लिए व्यंग!

1328 निाणवें रो फेर
निाणवें का फेर
उलन में पड़ने पर।

1329 निनांवे रो नांव कुण लेवै
निर्वंशीका नाम कौन ले?
अवांछित व्यक्ति का नाम कौन लेवे? अर्थात् नहीं लेना चाहिए।

1330 निरधन रा धन राम
निर्धन धन भगवान हैं।

1331 निबळ रा बळराम
निर्बल के बल भगवान हैं।

1332 नीकळी होठे चढी कोठे
मुंह से वचन रहस्य निकलने पर सर्वत्र फैल जाता है

1333 नीचला दांत नीचे और उपरला दांत ऊपर रहग्या
नीचे के दांत नीचे और ऊपर के दांत ऊपर रह गये।
स्तम्भित हो जाना, चकित हो जाना, आर्यचकित होना।

1334 नीची कीनी नाड़ बैरे आडी गोडां सूणी बाड़
जिसने गर्दन नीची कर ली उसके आगे मानो घुटनों तक ऊँची आड
खड़ी हो गई।
धैर्यवान व्यक्ति की हानि नहीं होती हैं

1335 नीची नीची काकळासर जा ढूकी
नीची–नीची काकलासर जा पहंुची।

1336 नीची बोरड़ी सै कोई धूणै
नीचे पेड़ को सब कोई धूनते है।
छोटे को सब ही सताते हैं।

1337 नीतोताई बेटो जायो नाड़े पैली नाक कटायो
नीतोताई ने बेटा जना तो नाल के पहले नाक कटाया।

1338 नीप्यो धोयो आंगणो पहरी ओढी नार
लीपा–धुला आंगन और गहने–कपड़े पहनी ओढी ी अच्छे लगते हैं

1339 नींबूड़ा मूंघा हु ज्यासी
नींबू महंगे हो जायंगे
पता पड जायगा, शेखी भूल जावोगे
आटे–दाल का भाव मालूम पड़ जायेगा

1340 नीम हकीम खतरे जान, जीम मुल्ला खतरे ईमान
अधकचरे वैद्य से जानको खतरा है और अधकचरे मुल्ले से ईमान को
खतरा है।
अधकचरा व्यक्ति किसी काम का नहीं।
मि.–स्पजजसम ादवूसमकहम पे ं कंदहमतवने जीपदहण्

1341 नीयत तांबो है
नियत तांबा है
नीयत खोटी है।

1342 नींवत जिसी बरकत
जैसी नियत वैसी बरकत।

1343 नुगणे कने सुगणो जाय सुगणे री पत जाय
निगु‍र्णी के पास गुणवान् जाता है तो गुणवान् की प्रतिष्ठा जाती है।

1344 नंूई काया नूई माया
नयी काया नयी माया

1345 नंई बात नव दिन
नयी बात नौ दिन नयी रहती है फिर पुरानी पड़ जाती है

1346 नूंई नव दिन पुराणी दस दिन
नयी बात नौ दिन रहती है पुरानी दस दिन।

1347 नूंई बात नौ दिन खैंचीताणी दस दिन
नयी बात नौ दिन तक नयी रहती है अधिक से अधिक दस दिन नवीन
बात की चर्चा थोड़े दिन चलकर मिट जाती है।

1348 नेम निमाणे धरम ठिकाणे
अंत में धर्म की जय होती है।

1349 नौकर मालक रा हां बैंगण रा कोनी
नौकर मालिक के हैं बैंगन के नहीं
हां में हां मिलाने वालों के लिए। इस पर एक कहानी है–
एक सेठजी ने अपने नौकर से कहा बैंगन बहुत बुरा होता है तो नौकरने कहा ‘जी हां इसमें क्या शक है फिर स्वामी बेाले यह तो बहुतबढि़या सब्जी है तभी तो इसके सिर मुकुट हैं। नौकर ने उत्तर दिया ‘आप बिलकुल ठीक फरमाते हैं। मालिक ने हंसकर कहा दोनों ही बातें ठीक बतलाते हो। नौकर बोला ‘मुझे तो आपको राजी रखना है। मैंआपका नौकर हूं बैंगन का नहीं।

1350 नौकरी, नौ करी’र एक नहीं करी
नौकरी शब्द का अर्थ है कि नौ बात की पर एक बात नहीं की
नौकर सौ काम करता है और एक काम नहीं करता तब भी उसकोफटकार पड़ती है। नौकरी करना बुरा है। नौकरी न कीजै बंदा घास खोद खाइयै। और खोदै आसपास, आप दूर जाइयै।।

1351 नौकरी रे नकारे रो बैर है
नौकरी के नकार से बैर है
नौकर मालिक के कथन से इनकार नहीं कर सकता।
इनकार करने से नौकरी नहीं हो सकती
नौकर को हमेशा आज्ञा पालन करते रहना चाहिए कभी भी ‘ना’ नहींकहना चाहिए।

1352 नौकरी है क भाई बंदी
नौकरी है या भाई बंदी
नौकरी में आराम नहीं।

1353 नौ चूल्हा री राख उडै
नौ चूल्हे की राख उड़ती है
कुछ भी नहीं है। धूल उड़ती है।

1354 नौ पूरबिया तरह चौका
नौ पूरबिया ब्राण और तेरह चौके
जब सबकी एक राय न हो
मि.–नौ कनौजिये तेरह चौके।

1355 न्हाया जिता ही पुण्य
जितन नहाये उतना ही पुण्य
अच्छा काम जितना किया उतना ही अच्छा

1356 न्हाररो कांई छोटो
सिंह का क्या छोटा
मि.–सांप रे बच्चे रो कंई छोटो

1357 न्हासतां ने दायजा कुण देवै?
भागते हुओं को दहेज कौन दे?