146. फाटा कपड़ा बूढा मार्ततांरी लाज नहीं करणी
फटै कपड़ों और बूढ़े मां–बापकी लाज नहीं करना चाहिअे।
147. फाटा कपड़ा मत देखो, घर दिल्ली है
फटे कपड़ों की ओर मत देखो, इसका घर दिल्ली में है (घरकी ओर देखो)
148. फाटा कपड़ा मत देखो, जातरी ईंदी है
फटे कपड़े मत देखो, जातकी ईंदी है (जातिकी ओर देखो)।
टिप्पणी–ईंदा पडि़हार (प्रतीहार) राजपूतों की अेक शाखा है।
149. फाड़नव़ाळैनै सीव़णव़ाळो को पूरौ नी
फाड़नेवालेको सीनेवाला नहीं पहूंच सकता (बराबरी नहंी कर सकता)
काम बनता धीरे–धीरे है, पर बिगड़ते देर नहीं लगती।
150. फाव़डै़रो नांव़ गुलसफो
फावड़े का नाम गुलसफा
आशा से बहुत थोड़ो प्राप्ति हो तब।
151. फिरै सो चरै, बंध्यो भूखां मरै
फिरता है सो चरता है
घर बैठे पेट नहीं भरता। घर बैठे रोजी नहीं मिलती।
152. फिराँ–घिरांसूँ आदमी हुव़ै
फिरने–घिरनेसे आदमी बनता है
यात्रा से अनुभव बढ़ता है।
153. फींचा पिणियारी गावै है (पाठान्तर–पग)
टांगें ‘पनिहारी’ गाती हैं।
बहुत थक गया है।
टि.–‘पणिहारी’ अेक गीतका नाम है।
154. फूटा भाग फकीरका भरी चिलम गुड़ ज्याय
फकीरके फूटे भाग कि भरी हुई चिलम लुढ़क जाती है
भाग्य विपरीत होनेसे बना–बनाया काम बिगड़ जाता है।
155. फूटी हांडी अवाजसूं पिछाणी जै
फूटी हांडी आवाज से पहचानी जाती है
बोलने पर बुरे आदमी का पता चलता है।
156. फूड करै सिणगार मांग ईंटासूं फोड़ै
फूहड़ जब श्रृंगार करती है तो ईंटोंसे मांगको फोड़ती है।
फूहड़ पर।
157. फूड़ रांडरै हुई तयारी, कुत्ता चाल्या रेवाड़ी
फूहड़ स्त्रीके घर भोजकी तय्यारी हुई तो कुत्ते–झुंड–के–झुंड चले
फूहड़ पर।
158. फूड़रा मैल फागणमें उतरै
फूहड़के मैल फागुन में उतरते हैं
फूहड़ जाड़ेभर नहीं नहाती।
159. फूफोजी रूससी तो भूवाजीनै राखसी
फूंफाजी रूठेगें तो फूफीजीको रख लेगें (और क्या करेंगें?)
कोई नाराज होगा तो क्या कर लेगा ?
160. फूल नहीं तो फूलरी पांखड़ी
फूल नहीं तो फूलकी पंखुरी
बहुत नहीं तो थोड़ा ही सही।
161. फूरी जागां पांखड़ी
फूलकी जगह पंखुरी।
162. फेरांरो दोस मती लाग्या
फेरों का दोष मत लगना
फेरोंका दोष लगनाफेरों यानी सप्तदी के बाद ही विधवा हो जाना।