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1075 तन सीतळ हो सीत सूं मन सीतल हो मीत सूं
तन शीत से शीतल होता है और मन मित्र से शीतल होता है
मित्र ही दु:ख के समय सच्ची शांति देता है
मि.– साचे मिंतर रा पड़ै, कान बीच सुबैण
मनडेरी तन्त्री बजे प्रेम प्रकाशे नैण
1076 तन सुखी तो मन सुखी
शरीर में रोग आदि होने पर मन सुखी नहीं रह सकता।
स्वास्थ्य मानसिक शांति के लिए अत्यावश्यक है।
1077 तलवार कुपिये री लड़ाई
तलवार और कुप्पी की लड़ाई
न एक को लाभ न दूसरे को हानि–दोनों और समान लाभ–हानि।
मि.–गाबर रो कुपियो’र काठ री तरवार
1078 तव़ो कहै हूं सोने रो थो चूल्हो कैवे चढ़तो थो म्हारे ऊपर इज हो
तवा कहता है ‘मैंने सोने का बना सुआ था।’ चूल्हे ने उत्तर दिया रखातो मेरे ऊपर जाता
था मेरे से तेरी असलियत क्या छिपी है?
हैसियत से ऊपर बातें करने वाले के प्रति व्यंग।
1079 तवो हांडी ने काळी बतावै
तवा हांड़ी को काली बतलाता है
उस व्यक्ति के लिये जो स्वयं दोषी होकर दूसरे को दोषी बतावे या दूसरे के दोषों के
लिये निन्दा करे।
ज्ीम ेववजल वअमत उवबो जीम इसंबा बीपउदमलण्
1080 ताजो माल तुरंत खपै
ताजा माल तुरंत बिक जाता है।
1081 तांतां सूं तांता पीवणा
धागे के एक छोर को दूसरे छोर से मिल जाना।
अनुकूल साधन प्राप्त होने पर।
1082 ताव ने कुण तेड़ौ जावै
ज्वर को कौन न्योता देने जावे।
आफत को कौन निमंत्रण देकर बुलावे? कोई नहीं।
व्यर्थ में आफत मोल नहीं ले लेनी चाहिए।
1083 ताव हाथी रा हाड भांगै
ज्वर हाथी के हाड़ भी तोड़ देता है।
हाथी जैसे बलवान् की भी ज्वर के आगे कुछ नहीं चलती।
1084 तिरिया–चिरत न जाणै कोय, मिनख मार के सत्ती होय
ी के चरित्र को कोई नहीं जानता वह पति को हाथों से मारकर भीउसके पीछे सती हो जाती
है।
ी–चरित्र की निंदा।
इस पर एक कहानी है–
राजा भर्तृ हरि भेष बदलकर रात्रि में गश्त लगाया करते थे। एक दिनउन्होंने एक कुलटा
ी को अपने प्रेमी के कहने पर अपने पति कोछुरी से मारते हुए देखा। पति का काम तमाम
करके वह लगी सिरपीट–पीटकर रोने–चिल्लाने हाय रे, दौड़ो कोई मेरे पति को मार
गया।भीड़ लग गई कोई कुछ कहने लगा तो कोई कुछ। उस कुलटा नेदेखा कि कहीं भेद खुल न
जाय अत: सबेरे ही पति के शव कोगोदी में लेकर चिता में बैठ गई और जीती ही जल मरी।
राजा भर्तृहरिने यह सब काण्ड बपनी आंखों से देखा और तब कहा त्रिया चरित्रम्पुरुषस्य
भाग्यं देवो न जानाति कुतो मनुष्या:
1085 तिरिया तेरा मरद अठारा
1 ी तेरह वरस पर और मर्द अठारह वरसपर विवाह–योग्य होताहै।
2 तेरह वर्ष की लड़की की 18 वर्षके लड़के के साथ अच्छी जोड़ीमिलती है।
1086 तिरिया तेल हमीर हठ चढै न दूजी बार
ी के तेल दुबारा नहीं चढ़ता ओर राजा हम्मीर दुबारा हठ पर नहींचढ़ता।
ी का विवाह एक ही बार होता है।
1087 तिस लाग्यां कूवो थोड़ी ही खुदै
प्यास लगने पर कुंआ कहीं खुदता है?
किसी काम का उपाय पहले से कर रखना चाहिए।
काम आ पड़नेप र उपाय करने लगे तो वह पार नहीं पड़ता।
1088 तीजे चावळ सीजै चौथ लोक पतीजै
कोई बात तीसरी बार हो तो कुछ विश्वास के योग्य होती है पर चौथीबार होने पर पूरा
विश्वास हो जाता है।
1089 तीतर रे मूंढे में सदा कुसळ
तीतर के मुंह में सदा कुशल
तीतर का बोलना शकुन है।
1090 तीन आंगळ रो लिलाड़ जके में ही दो सळ
तीन अंगुल का ललाट और उसमें भी दो सल
आगे तो ललाट हीे छोटा फिर वह भी दो सलवाला
मि.–करेला और नीम चढ़ा
1091 तीन तिकट महा विकट
तीन का गुट या साथ बुरा।
1092 तीन तेरह घर बिखेरह
तीन का साथ बुरा और असगुनी समा जाता है।
1093 तीन बुलाया तेरह आया
तीन को न्यौंता दिया तो जीमने को तेरह आये।
1094 तीन बुलाया तेरह आया भई राम की वाणी
राघो चेतन यों कहे ‘ठेल दाल में पाणी’
तीन बुलाये और तेरह आये। रोघोचेतन यों कहता है कि दाल में पानीडालकर बढ़ा लो।
1095 तीन लोक सूं मथरा न्यारी
तीनों लोकों से मथुरा निराली।
जब कोई व्यक्ति निराला आचरण करता है तब कही जाती है।
1096 तीर नहीं तो तुक्को इ सही
पूरा नहीं तो अधूरा ही लाभ सही।
1097 तुरकणी रे कात्योड़े में ही फिदड़को
तुर्कनी के काते हुए में भी एक ऊन का गुच्छा लगा हुआ।
त्रुटिपूर्ण काम होने पर।
1098 तुरत दान महा कल्याण महापुन पाठारन्तर.
दान तुरत दे देना चाहिये।
1099 तुरत मजूरी जो परखावै ज्यांरो काम तुरत हो जाय
जो तुरन्त मजदूरी देता है उसका काम भी तुरन्त हो जाता है
काम करना हो तो मजदूरी तुरन्त दे दो।
1100 तूं जाणै थारो काम जाणै
जू जाने तेरा काम जाने हमें कोई मतलब नहीं।
जब कोई कहना नहीं मानता और मन की करता है तब कही जातीहै।
1101 तूठो व़ाणियो रूठो राव
रीा हुआ बनिया और रूठा हुआ राजा बराबर है।
1102 तूं डाळ डाळ तो हूं पात–पात
तूं डाल–डाल तो मैं पात–पात
तुम्हारी चालों को खूब समता हूं।
1103 तं फिरै डाळ–डाळ हूं फिरूं पात–पात
तू फिरता है डाली डाली मैं फिरता हूं पत्ते–पत्त्।े
अूपरवाली कहावत देखिये
1104 तूं मने हूं तने
तू मुझे मैं तूझे।
परस्पर स्वार्थ सिद्ध करना। परस्पर बड़ाई करना।
ज्ञं उमए ंदक प् ूपसस ां जीममण्
1105 तूं म्हारे दे बाके में हूं थारे दंू आंख में
तू मेरे मुंह में उंगली दे मैं तेरे आंख में उंगली दूं।
दोनों प्रकार अपना मतलब बनाना और दूसरे की हानि करना।
1106 तेरस कै तीज
तेरस या तीज
तेरस या तीज ये दो शुभ महूर्त के दिन माने जाते है।
मि.–अणपूछ्यो मूरत भलो का तेरस का तीज।
1107 तेरह तीन अठारे डोढा डांडा
तेरह तीन अठारह ज्यौढ़े।
छि–भि हो जाना।
1108 तेरा तेल गया मेरा खेल गया
दोनों बराबर होने पर।
1109 तेल जितो खेल
जितना तेल उतना खेल
जितना आयु उतना जीवन।
जितनी शक्ति उतना काम होता है।
1110 तेलण सूं नहीं मोचण घाट, बैरी मोगरी बैरीलाट
तेलिन से मोचिन किसी प्रकार घटकर नहीं....
दोनों एक–जैसे होते है।
1111 तेल तेली री बळै, मसालची री गांड क्यूं बळै
तेल तेली का जलता है मसालची क्यों क्रुद्ध होता है?
जब हानि किसी को है और चिढ़े कोई तब।
1112 तेल देखो तिलांरी धार देखो
तेल देखो तेल की धार देखो
हर एक काम को सोच समकर करो।
1113 तेल तो तिलां मांय सूं ही निकळै
तेल तो तिलों से ही निकलता है।
जितनी पूंजी उतना नफा।
1114 तेली रो बळद सौ कोस चाळै तोई बठे–रो–बठे
तेली का बैल सौ कोस चलता है तो भी वहीं–का–वहीं रहता है।
1115 तेली सूं खळ ऊतरी हुई बळीते जोग
तेली से उतरते ही खली जलाने के योग्य हो गई।
परस्पर सम्बन्ध विच्छेद होने पर।
1116 तैरूरी पहली रांड
तैराक की ी पहले रांड होती है।
तैरने में नहीं तैरने की अपेक्षा अधिक खतरा है।
ळववक ेूपउउमेे ंतम वजिमदेमक कतवूदमकण्
1117 तै सूं बोलै जकेरो गुर ूठो
जो तु से बोले उसका गुरु झूठा।
तु से कभी न बोलूंगा। तु से कभी व्यवहार न करूंगा।
1118 तोत रा घोड़ा किताक चालै!
झूठ के घोड़े कितने चलें?
बनावटी
1119 तोय भजूं पण मोय न भजूं
तुझे भजूंगा पर अपने को नहीं भजूंगा।
अपना ही स्वार्थ देखने तथा पराये का ध्यान नहीं रखने पर ।
कंजूस के लिये भी कही जाती है।