1023 ठण्ठारे री मिी खड़के सूं थोड़ी ही डरै
ठंठोरे की बिल्ली खड़के से थोड़े डरती है।
ठंठेरे के यहां सदा खटाखट होती रहती है। वहां रहने वाली बिल्ली खटखट करने से डरकर नहीं भागती क्योंकि वह तो सदा खटखटसुनती रहती है।
हमेशा बक क करने वाले का भय नहीं लगता।

1024 ठण्ढो न्हावै तातो खावै व्यांरे वैद कदे नहिं आवै
जो ठंढे पानी से स्नान करता है, गर्म अर्थात् ताजा भोजन करता है
उसके यहां वैद्य कभी नहीं जाता।
ऐसा मनुष्य कभी बीमार नहीं पड़ता–

1025 ठंडो लो ताते ने खावै–
ठंढा लोहा गर्म लोहे को खा जाता है।
जो क्रोध नहीं करता वह क्रोधी से अच्छा रहता है।

1026 ठगां रे किसी मासी
ठगों के कौनसी मौसी
ठग या बदमाश किसी संबंध का ख्याल नहीं करते वे सभी को ठगलेते है।

1027 ठगायां सूं ठाकर हुवै पा. बाज
ठगाने से ठाकुर होता है, धोखा खाने से आदमी सयाना होता है। उदारव्यक्ति ही बड़ा कहलाता हैं

1028 ठण ठण पाल मदन गोपाल
ठन ठन पाल मदन गोपाल
खाली हाथ हो तब कहा जाता है।

1029 ठाकर ने चाकर घणा
ठाकुर को चाकर बहुत

1030 ठाकर गया ठग रह्या रह्या मुलकरा चोर
ठाकुर चले गये, ठग रह गये और रह गये मुल्क भर के चोर।
आजकल के जागीरदारों पर कटाक्ष।

1031 ठाकरां की टाबर टूबर है, कै–भाई रे साले रे दो टाबर का है।
ठाकुर साहब, कुछ सन्तान है? तो कहते हैं–हां, भाई साले के दो बच्चेहैं।

1032 ठाकुर द्वारो चवड़ो घणां?
ठाकुर द्वारा चौड़ा बहुत।
1 हैसियत से ऊपर काम करनेकी डिंग मारने वालों के प्रति।
2 ऐसा करने की सामथ्र्य नहीं है।

1033 ठाठ तिलक और मधरी बाणी, दगाबाज की यही निसाणी
ठाठ, तिलक और मीठे बोल–दगाबाज की यह निसानी है।
जो ऊपर से बहुत ठाठ करते हैं और अधिक मीठे बोलते हैं, वेअवश्य धोखेबाज होते हैं।

1034 ठावे ठावे टोपली बाकी ने लंगोट
चुने चुनों को टोपी और बाकी को लंगोट।
जरूरी जरूरी बातों को करके शेष को छोड़ देने पर, योग्य पुरुषों कोसम्मानित करके शेष की ओर उपेक्षा करनेपर।

1035 ठिकाणां सूं ठाकर बाजै
ठिकाने जागीर से ठाकुर कहलाते हैं।

1036 ठिकाणे ठाकर पूजीजै
ठिकाने स्थान पर ठाकुर पूजा जाता है।
अपने स्थान पर सबका आदर होता है। ठाकुर या राजा अपने स्थान सेबाहर चला जाय तो कोई नहीं पूछता।

1037 ठीकरी घड़ो फोड़ नाखै
ठीकरी घड़ा फोड़ डालती है।
साधारण व्यक्ति बड़े व्यक्ति को हानि पहुंचा सकता है।

1038 ठोठ पोसालियां ने बतरणा घणा
मूर्ख विद्यार्थियों को पी पर लिखने की कलमें बहुत ।